बलूचिस्तान में जारी संघर्ष और जाफर एक्सप्रेस हाईजैक
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों ने 11 मार्च को जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था। Balochistan के इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। कुछ वीडियो को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि ये सब ट्रेन के यात्रियों ने रिकॉर्ड किया होगा। कुछ वीडियो में जगह-जगह हथियार और शव भी पड़े दिखाई दिए।
अब सोचने वाली बात यह है कि बलूचिस्तान में यह खूनी संघर्ष आखिर क्यों हो रहा है?
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि जाफर एक्सप्रेस हाईजैक संकट लगभग 36 घंटे तक चला और सभी बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाकों को मार गिराया गया। लेकिन Pakistan Sarkar कभी यह नहीं बताती कि बलूचिस्तान में ऐसी घटनाएँ बार-बार क्यों होती हैं। यहाँ आए दिन हिंसा और संघर्ष की घटनाएँ देखने को मिलती हैं। गरीबी और दयनीय हालात में जी रहे बलूच लोगों के लिए जीवन कठिन होता जा रहा है। यहाँ की स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि यह क्षेत्र धीरे-धीरे मानव सभ्यता के पतन की ओर बढ़ रहा है।
यदि आपको बलूचिस्तान के संघर्ष के पीछे के कारणों को समझना है, तो पहले बलूचिस्तान के इतिहास को गहराई से जानना होगा। तभी यह स्पष्ट होगा कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान के प्रति विद्रोह क्यों जारी है। आइए अब बलूचिस्तान के इतिहास पर एक नज़र डालते हैं।
बलूचिस्तान का इतिहास
बलूचिस्तान का इतिहास बहुत पुराना है, और इसके विभिन्न क्षेत्रों के अध्ययन से पता चलता है कि इसका इतिहास लगभग 7000 ईसा पूर्व तक जाता है। यहां कई राजवंशों ने शासन किया है, जिनमें इंडो-सीथियन और कुषाण वंश भी शामिल हैं।
लगभग 1400 वर्ष पहले, यह क्षेत्र मकरान के नाम से जाना जाता था। उस समय यहाँ सिंध के रॉय राजवंश का शासन था। उस दौर में इस्लाम धर्म इस क्षेत्र में नहीं पहुँचा था, और यहाँ की आबादी मुख्य रूप से हिंदू और बौद्ध समुदायों की थी।
7वीं शताब्दी में, जब अरब में इस्लाम धर्म की स्थापना हुई, तब यह क्षेत्र लगातार विदेशी आक्रमणों का शिकार हुआ। धीरे-धीरे, इन आक्रमणों के कारण यहाँ की आबादी और सांस्कृतिक संरचना बदल गई, जिससे हिंदू और बौद्ध समुदायों का वर्चस्व समाप्त हो गया।
बलूचिस्तान: संसाधनों से भरपूर लेकिन गरीब राज्य
बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो देश के दक्षिणी हिस्से में ईरान की सीमा से सटा हुआ क्षैत्र है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है और यहाँ तांबा, गैस और कोयले के विशाल भंडार पाए जाते हैं।
लेकिन सोचने वाली बात यह है कि इतनी प्राकृतिक संपदा होने के बावजूद बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत बना हुआ है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं देती। जिसकी वजह से यहां गरीबी और पिछड़ेपन देखने को मिलता है।
प्राचीन इतिहास:
1. प्रागैतिहासिक काल:
रिसर्च से पता चला है कि बलूचिस्तान में मानव बस्तियों की होने की जानकारी पुरापाषाण काल से मिलते-जुलते हैं। यहां पर यह भी जानकारी मिली कि यहां लोग शिकार करना जानते थे और पत्थर के उपकरण उपयोग करते थे। नवपाषाण काल के गाँवों के अवशेषों की भी मिलने की जानकारी बलूचिस्तान से मिलता है।
2. सिंधु घाटी सभ्यता:
एक रिसर्च से यह भी पता चला है कि 2500 ईसा पूर्व तक बलूचिस्तान सिंधु घाटी सभ्यता के सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र में था।
3. प्राचीन राजवंश:
बलूचिस्तान के कुछ क्षेत्र पर विभिन्न राजवंशों का शासन रहा, जिनमें इंडो-सीथियन और कुषाण वंश प्रमुख थे।
4. सभ्यता का केंद्र:
बलूचिस्तान प्राचीन काल से ही कई सभ्यतों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इसका संपर्क विश्व की प्रमुख सभ्यताओं से होता रहा है।
मध्यकालीन और आधुनिक काल
1. इस्लामी शासन:
7वीं शताब्दी में इस्लाम के आगमन से पहले, बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों पर इंडो-सीथियन राजवंश और परताराजाओं का शासन था।
2. मुगल और ब्रिटिश शासन:
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि मुगल साम्राज्य के प्रभाव के बाद ही बलूचिस्तान ब्रिटिश शासन का हिस्सा बना।
3. स्वतंत्रता और विभाजन:
जब भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ, तब भारत और पाकिस्तान के विभाजन के दौरान बलूचिस्तान पाकिस्तान में शामिल हो गया।
4. बलूचिस्तान में संघर्ष:
पाकिस्तान के गठन के बाद से ही बलूचिस्तान में संघर्ष और विद्रोह की स्थिति बनी हुई है।
5. बलूच विद्रोह:
बलूचिस्तान में बलूच समुदाय अपनी भाषा, संस्कृति और अलग पहचान रखता है, जो अक्सर पाकिस्तानी सरकार से टकराव का कारण बनता है।
ब्रिटिश शासन और बलूचिस्तान
1783 में, जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, उस समय ग्वादर बंदरगाह को ओमान के सुल्तान को बेच दिया गया था। उस समय बलूचिस्तान की इस रियासत को कलात (Kalat) कहा जाता था।
आजादी से पहले भारत में कुल 565 रियासतें थीं, और बलूचिस्तान भी उनमें से एक था। हालाँकि, इस रियासत ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई थी। बलूच शासक हमेशा खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र मानते रहे थे।
आजादी के बाद की स्थिति
1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली और इसके साथ ही भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ। उस समय सभी रियासतों को दो विकल्प दिए गए:
- वे भारत या पाकिस्तान में विलय कर सकते हैं।
- वे एक स्वतंत्र राष्ट्र बने रह सकते हैं।
बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय
उस समय बलूचिस्तान ने स्वतंत्र रहने का निर्णय लिया और घोषणा की कि वह एक स्वतंत्र राष्ट्र बना रहेगा। हालाँकि, पाकिस्तान बलूचिस्तान पर लगातार दबाव बना रहा था कि वह पाकिस्तान में विलय कर ले, लेकिन बलूच नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया।
अचानक, 27 मार्च 1948 को आकाशवाणी के माध्यम से भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार ने जानकारी दी कि बलूचिस्तान भारत में विलय करना चाहता है, लेकिन भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। जब यह बात मोहम्मद अली जिन्ना को पता चली, तो उन्होंने 29 मार्च 1948 को पाकिस्तान की सेना को बलूचिस्तान पर हमला करने का आदेश दिया। इसके बाद, बलपूर्वक बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिला लिया गया।
तब से ही पाकिस्तान और बलूचिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। बलूच लोगों का मानना है कि यह विलय जबरन कराया गया था और उनकी मर्जी के खिलाफ था। वे आज भी स्वतंत्रता की माँग कर रहे हैं।
आर्थिक स्थिति का विवरण
बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से असंतुष्ट हैं क्योंकि पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का 44% हिस्सा बलूचिस्तान के अंतर्गत आता है, लेकिन संसदीय प्रतिनिधित्व में इसकी हिस्सेदारी केवल 6% है। यह क्षेत्र तांबा, गैस और कोयले जैसे खनिजों से लगभग 1000 करोड़ रुपये की कमाई करता है, फिर भी यहाँ के लोग अत्यधिक गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
बलूचिस्तान में आज भी खाद्य संकट बना हुआ है, और यहाँ के लोग गरीबी से जूझ रहे हैं। इस क्षेत्र की लगभग 71% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रही है। विश्व स्तर पर भी यह क्षेत्र अत्यधिक गरीबी और बदहाली के लिए जाना जाता है। जबकि यहाँ तांबा, सोना, चाँदी और यूरेनियम के विशाल भंडार मौजूद हैं, फिर भी स्थानीय लोगों को इनका लाभ नहीं मिल पाता।
भौगोलिक स्थिति
बलूचिस्तान ऐतिहासिक रूप से चार भागों में विभाजित था—कलात, खैराब, लासबेला और मकरान। इनमें से सबसे शक्तिशाली रियासत कलात थी, जिसके शासक मीर अहमद खान थे।
बलूचिस्तान के संघर्ष को और अधिक गहराई से समझने के लिए नीचे दिए गए वीडियो को ध्यानपूर्वक देखें।
प्रमुख रिसर्च स्रोत: विकिपीडिया
निष्कर्ष
अब तक आप समझ चुके होंगे कि बलूचिस्तान में लोग गरीबी, शोषण और संघर्ष का शिकार क्यों बन रहे हैं। पाकिस्तान सरकार द्वारा इस क्षेत्र की अनदेखी और जबरन नियंत्रण के कारण यहाँ की जनता लंबे समय से असंतोष और विद्रोह के रास्ते पर उतर चुकी है। बार-बार होने वाली हिंसक घटनाएँ, जैसे जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, इस क्षेत्र की जटिल समस्याओं को उजागर कर रही हैं।
बलूचिस्तान के इतिहास पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र हमेशा से अपनी अलग पहचान और स्वायत्तता के लिए संघर्ष करता आ रहा है। लेकिन संसाधनों का शोषण, राजनीतिक अधिकारों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की अनुपलब्धता ने इसे अस्थिरता की ओर धकेल दिया है।
यदि पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान में स्थिरता और शांति बनाए रखना चाहती है, तो उसे जबरदस्ती की नीति छोड़कर इस क्षेत्र के विकास, रोजगार और शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। वरना, यहाँ पर संघर्ष और अधिक बढ़ता जाएगा तथा बलूचिस्तान में हालात और बिगड़ते रहेंगे।
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